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पुलिस व व्यापार मंडल पर आरोप की बजाये अपनी सोच बदले वाहन चालक

वाहन चालकों के ट्रैफिक नियमों को तोडऩे की जिद छोडऩे से सुधरेगी यातायात व्यवस्था साइकिल बाजार चौंक में जिद से हुये ट्रैफिक जाम को पुलिस व पत्रकार ने सुधारा वाहन चालक पहले आप की तर्ज पर चलें, मैं की तर्ज पर नहीं महानगरों में जाते ही सुधर जाते है छोटे नगरों के वाहन चालक

फाजिल्का, 10 नवंबर (दीपक नागपाल/पारस कटारिया):

नगर के किसी बाजार में जब ट्रैफिक समस्या उत्पन्न होती है तो वाहन चालक अपने भीतर झांकने की बजाये कभी पुलिस प्रशासन पर आरोप लगाने शुरू कर देते हैं कि पुलिस निकम्मी है। यातायात व्यवस्था को सुचारु नहीं करती और कभी व्यापार मंडल पर आरोप मढऩे शुरू कर देती है कि उसने आड ईवन फार्मूला लागू नहंी होने दिया। इसलिये ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार नहंी हो रहा। लेकिन कभी भी किसी वाहन चालक ने यह नहीं सोचा कि वह अपने वाहन को किस दिशा से गुजार रहा है। कभी डिवाइडर के बीच में पैदल के लिये बनी छोटी क्रासिंग से मोटरसाइकिल गुजारने की कोशिश होती है। कभी विपरीत दिशा से आकर सही दिशा में चल रहे वाहन चालक को परेशान किया जाता है। अधिक भीड़ वाले बाजार में नाजायज तौर पर ओवर टेक किया जाता है। लाइन में चल रहें वाहनों के आगे आकर अपना वाहन अड़ा दिया जाता है। जिससे लाइन रुक जाती है ओर सामने से आ रहा ट्रैफिक भी थम जाता है। रोकने पर झगड़ा भी होता है। अपनी सोच को संकुचित करके वाहन चालकों ने ट्रैफिक व्यवस्था को गंभीर कर दिया है। वाहन अधिक नहीं होते, लेकिन वाहन चालकों के अडिय़ल रवैये के कारण समस्या पैदा हो जाती है और पुलिस व व्यापार मंडल पर आरोप का सिलसिला शुरू हो जाता है। जब वाहन चालक अड़ते है तो पीछे से वाहनों की लाइन लगनी लाजिमी है। अगर वाहन चालक अपनी सोच को सही रखकर यह सोचे बिना कि चौंक में सिपाही खड़ा है अथवा नहीं सही ढंग से चले और संयम से काम ले तो शायद मामूली आबादी वाले इस नगर फाजिल्का में ट्रैफिक समस्या का सामना किसी को न करना पड़े।
ऐसा ही आज साइकिल बाजार चौंक में देखने को मिला। दोपहर लगभग 1.45 पर शास्त्री चौंक की और से चल रहे ट्रैफिक के बीच कोर्ट रोड़ से निकले दो मोटरसाइकिल सवारों ने अपने वाहन अड़ा दिये। उन वाहनों के दोनों और से अन्य वाहन गुजरने लगे। गौशाला रोड़ पर खड़े वाहन भी अन्य वाहनों को गुजरते देख बीच में आकर धंस गये। चौंक में फंसे वाहन चालकों ने पहले आप नहीं पहले मैं की धुन सवार हो गई। देखते ही देखते चारों और से वाहनों की लाइनें लग गई और सायरन ध्वनि प्रदूषण फैलाने लगे। यह सही है कि उस समय चौंक में कोई भी सिपाही नहीं था। वाहन चालकों को गुत्थम गुत्था होते देख सरहद केसरी के पत्रकार पारस ने पुलिस को फोन किया। 10 मिंट के बाद एक सिपाही मौके पर पहुंचा और आते ही कहने लगा कि यहां एक आदमी का काम नहीं है, थाने में पुलिस नहंी है, वह अकेला क्या करे। तब पत्रकार पारस कटारिया ने खुद पुलिस कर्मी का साथ दिया और ट्रैफिक व्यवस्था को सुचारु किया। दोपहर 2.26 तक लाइन क्लीयर थी यातायात सुगम हो गया। अगर सभी वाहन चालक अपनी जिम्मेदारी समझे तो शायद नगर में ट्रैफिक व्यवस्था से सुचारू ढंग से ही चले।
चंडीगढ़ व अन्य महानगरों में प्रत्येक चौंक पर सिपाही नहीं होता और ट्रैफिक जाम की समस्या भी बहुत कम होती है। क्योंकि वाहन चालक सुझवान है, लाइन में चलते हैं और ट्रैफिक नियमों का पालन करते हैं।

Source Sarhad kesri
Via Fazilka online

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