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हादसे में खोए अपने, अब बचा रहे दूसरों की जान

अमृत सचदेवा, फाजिल्का

फाजिल्का का युवा आरिश मदान, जिसके पिता व चाचा-चाची की मौत सड़क पर सामने से अचानक बेसहारा पशु के आने के कारण हो गई थी, ने अब ऐसे हादसों से दूसरे परिवारों को बचाने का बीड़ा उठाया लिया है। आरिश ने एक अभियान शुरू कर लावारिस मवेशियों के गले में रेडियम रंगों वाली बेल्ट डालने का काम शुरू किया है। शुरुआत में वह अपने पल्ले से पैसे खर्च कर जहा भी उसे बेसहारा मवेशी मिलता था, उसके गले में बेल्ट डाल देता था, लेकिन अब उसे लोगों का साथ मिलने लगा है। उसका अभियान सोशल मीडिया पर वायरल होने से की लोग उसके अभियान से जुड़ रहे हैं। कोई आर्थिक सहायता दे रहा है तो कोई खुद आरिश के साथ मिलकर लावारिस पशुओं के गले में बेल्ट डालने के काम में जुटा है।

आरिश व उसकी टीम ने बेसहारा पशुओं की भारी संख्या वाले खुईखेड़ा गाव में रविवार को भी मवेशियों के गले में बेल्ट डालने का अभियान चलाया।

बता दें कि आरिश के पिता लेक्चरर अशोक मदान, उनके चाचा पवन कुमार व चाची का चंडीगढ़ से लौटते हुए 24 जुलाई की रात को जलालाबाद के निकट सड़क पर सामने से अचानक लावारिस पशु के आने के कारण सामने से आ रहे कैंटर से टक्कर में मौत हो गई थी। इस दुखद हादसे से उबरने में तो काफी वक्त लगेगा, लेकिन स्व. अशोक के बेटे आरिश ने अब किसी अन्य की जान लावारिस पशुओं की वजह से न जाए इसके लिए उसने लावारिस मवेशियों के गले में रेडियम बेल्ट डालने का बीड़ा उठाया है। आरिश ने शुरुआत में दिल्ली से 300 बेल्ट बनवाई, जो लगभग वह मवेशियों के गले में बाध चुका है। यह बेल्ट 30 से 35 रुपये में बनती है। इस कार्य में गोसेवा में कार्यरत संस्था श्री नारायण वेलफेयर सोसायटी के अध्यक्ष अशोक कुक्कड़, अनमोल वर्मा, साजन, साहिल नारंग, राजन व मगनरेगा अधिकारी अतुल मोंगा सहयोग कर रहे हैं। रविवार को भी उनकी टीम ने गाव खुईखेड़ा जाकर 40 से अधिक मवेशियों के गले में बेल्ट पहनाई।

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जिले में मवेशियों के कारण हुई आठ लोगों की मौत

फाजिल्का जिले में मवेशियों के कारण हुए हादसों में जान गंवाने वालों में आरिश के पिता व चाचा-चाची के अलावा गाव बोदीवाला पीथा निवासी 25 वर्षीय संजय पुत्र नंद लाल, दो अक्टूबर की रात को अबोहर धींगड़ा फार्म निवासी 27 वर्षीय स्माइल फुटेला, उसी रात को दूसरा हादसा अबोहर-श्रीगंगानगर मार्ग पर मौजगढ़ निवासी राजिन्द्र पुत्र राम प्रसाद, पाच अक्टूबर को अबोहर-फाजिल्का का बाधा रोड निवासी रामचंद्र दास का 28 वर्षीय बेटा राजेश डीजे साउंड का काम करता था। वीरवार अलसुबह वह अपने साथी रिशु व विक्त्रम के साथ बाइक पर सवार होकर श्रीगंगानगर जा रहा था कि अबोहर-श्रीगंगानगर मार्ग पर गाय सैयदावाली के निकट बाला जी मंदिर के पास अचानक सड़क पर पशु आ गया जिससे बाइक पशु से टकरा गया व बाइक पर सवार तीनों युवक घायल हो गए, जिन्हें सरकारी अस्पताल में पहुंचाया जहा डॉक्टरों ने राजेश को मृत घोषित कर दिया।

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ये लोग कर रहे आरिश का समर्थन

आरिश द्वारा चलाए अभियान में सौरभ वधवा, राघव अंगी, नीरज जग्गा, मंजरी मक्कड़, रजत मिढ्डा, रिंपल रहेजा, विशाल शर्मा, रूपेश शर्मा आर्थिक सहयोग के लिए आगे आए हैं। इसके अलावा गौरव नागपाल, रंजना शर्मा, संजीव ग्रोवर, आयना तनेजा, हैप्पी खुराना, वंश सचदेवा, मनु गौतम, साहिल बजाज सहित सैकड़ों लोगों ने उसके अभियान को सराहा है। आरिश का कहना है कि जिस तरह से उसे समर्थन मिल रहा है, वह आगामी डेढ़ से दो महीने में 10 हजार मवेशियों के गले में रेडियम बेल्ट डालने का लक्ष्य पूरा कर लेगा व उसके बाद भी अभियान जारी रहेगा।

फाजिल्का का युवा आरिश मदान, जिसके पिता व चाचा-चाची की मौत सड़क पर सामने से अचानक बेसहारा पशु के आने के कारण हो गई थी, ने अब ऐसे हादसों से दूसरे परिवारों को बचाने का बीड़ा उठाया लिया है। आरिश ने एक अभियान शुरू कर लावारिस मवेशियों के गले में रेडियम रंगों वाली बेल्ट डालने का काम शुरू किया है। शुरुआत में वह अपने पल्ले से पैसे खर्च कर जहा भी उसे बेसहारा मवेशी मिलता था, उसके गले में बेल्ट डाल देता था, लेकिन अब उसे लोगों का साथ मिलने लगा है। उसका अभियान सोशल मीडिया पर वायरल होने से की लोग उसके अभियान से जुड़ रहे हैं। कोई आर्थिक सहायता दे रहा है तो कोई खुद आरिश के साथ मिलकर लावारिस पशुओं के गले में बेल्ट डालने के काम में जुटा है।

आरिश व उसकी टीम ने बेसहारा पशुओं की भारी संख्या वाले खुईखेड़ा गाव में रविवार को भी मवेशियों के गले में बेल्ट डालने का अभियान चलाया।

बता दें कि आरिश के पिता लेक्चरर अशोक मदान, उनके चाचा पवन कुमार व चाची का चंडीगढ़ से लौटते हुए 24 जुलाई की रात को जलालाबाद के निकट सड़क पर सामने से अचानक लावारिस पशु के आने के कारण सामने से आ रहे कैंटर से टक्कर में मौत हो गई थी। इस दुखद हादसे से उबरने में तो काफी वक्त लगेगा, लेकिन स्व. अशोक के बेटे आरिश ने अब किसी अन्य की जान लावारिस पशुओं की वजह से न जाए इसके लिए उसने लावारिस मवेशियों के गले में रेडियम बेल्ट डालने का बीड़ा उठाया है। आरिश ने शुरुआत में दिल्ली से 300 बेल्ट बनवाई, जो लगभग वह मवेशियों के गले में बाध चुका है। यह बेल्ट 30 से 35 रुपये में बनती है। इस कार्य में गोसेवा में कार्यरत संस्था श्री नारायण वेलफेयर सोसायटी के अध्यक्ष अशोक कुक्कड़, अनमोल वर्मा, साजन, साहिल नारंग, राजन व मगनरेगा अधिकारी अतुल मोंगा सहयोग कर रहे हैं। रविवार को भी उनकी टीम ने गाव खुईखेड़ा जाकर 40 से अधिक मवेशियों के गले में बेल्ट पहनाई।

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जिले में मवेशियों के कारण हुई आठ लोगों की मौत

फाजिल्का जिले में मवेशियों के कारण हुए हादसों में जान गंवाने वालों में आरिश के पिता व चाचा-चाची के अलावा गाव बोदीवाला पीथा निवासी 25 वर्षीय संजय पुत्र नंद लाल, दो अक्टूबर की रात को अबोहर धींगड़ा फार्म निवासी 27 वर्षीय स्माइल फुटेला, उसी रात को दूसरा हादसा अबोहर-श्रीगंगानगर मार्ग पर मौजगढ़ निवासी राजिन्द्र पुत्र राम प्रसाद, पाच अक्टूबर को अबोहर-फाजिल्का का बाधा रोड निवासी रामचंद्र दास का 28 वर्षीय बेटा राजेश डीजे साउंड का काम करता था। वीरवार अलसुबह वह अपने साथी रिशु व विक्त्रम के साथ बाइक पर सवार होकर श्रीगंगानगर जा रहा था कि अबोहर-श्रीगंगानगर मार्ग पर गाय सैयदावाली के निकट बाला जी मंदिर के पास अचानक सड़क पर पशु आ गया जिससे बाइक पशु से टकरा गया व बाइक पर सवार तीनों युवक घायल हो गए, जिन्हें सरकारी अस्पताल में पहुंचाया जहा डॉक्टरों ने राजेश को मृत घोषित कर दिया।

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ये लोग कर रहे आरिश का समर्थन

आरिश द्वारा चलाए अभियान में सौरभ वधवा, राघव अंगी, नीरज जग्गा, मंजरी मक्कड़, रजत मिढ्डा, रिंपल रहेजा, विशाल शर्मा, रूपेश शर्मा आर्थिक सहयोग के लिए आगे आए हैं। इसके अलावा गौरव नागपाल, रंजना शर्मा, संजीव ग्रोवर, आयना तनेजा, हैप्पी खुराना, वंश सचदेवा, मनु गौतम, साहिल बजाज सहित सैकड़ों लोगों ने उसके अभियान को सराहा है। आरिश का कहना है कि जिस तरह से उसे समर्थन मिल रहा है, वह आगामी डेढ़ से दो महीने में 10 हजार मवेशियों के गले में रेडियम बेल्ट डालने का लक्ष्य पूरा कर लेगा व उसके बाद भी अभियान जारी रहेगा।

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