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प्रशासन की बेरुखी, सडक़ की बेबसी, राहगीरों की आंखों से टपका रही है आंसू

चार वर्षों से बीकानेरी रोड़ पर डाला पत्थर दिल, दिमाग व पैरों पर पैदा कर रहा है चुभन
आधा दर्जन अस्पतालों, तीन मंदिरों व तीन स्कूलों को जोडऩे वाली सडक़ खस्ता हाल
फाजिल्का (संदीप चलाना): स्थानीय तीर्थ चौंक से शुरू होकर लगभग आधा दर्जन नामी अस्पतालों, विश्वकर्मा मंदिर, बबोसा मंदिर व शिव वाटिका तीन स्कूलों व अन्य आवासीय कालोनियों को जोड़ती हुई बार्डर रोड से जुडऩे वाली बीकानेरी रोड़ के नाम से विख्यात सडक़ प्रशासन की बेरुखी व अपनी बेबसी पर आंसू बहा रही है। इसकी सुध लेना वाला कोई नजर नहीं आता। लगभग 4 वर्ष पूर्व इसे वन वे करके डिवाइडर बनाया गया। दोनों सडक़ों पर मोटा पत्थर डाला गया। इसके बाद किसी ने इसकी सुध नहीं ली। दर्जनों गांवों को जोडऩे वाली इस सडक़ पर पैदल चलने वालों के पैरों में पत्थर चुभते हैं, दो पहिया व चार पहिया वाहनों टायरों के पटाखे फुटते हंै। हालांकि इस सडक़ पर अस्पताल हैं लेकिन मरीजों को यहां पहुंचाने के लिये आटो रिक्षा चालक भी जवाब दे देते हैं। इस सडक़ के करीब रहने वाले संदीप शर्मा ने बताया कि इस संबंध में नगर परिषद को कई बार पत्र लिखे जा चुके हैं लेकिन सडक़ का सुधार नहीं हुआ। उन्होंने बताया कि इस सडक़ पर लगा ट्रांसफार्मर का हैंडल सडक़ की तरफ लगभग डेढ़ फुट बढ़ा हुआ है और कई हादसों को अंजाम दे चुका है। सडक़ पर डाला गया पत्थर भी कई राहगीरों को चोटिल कर चुका है। कालोनी निवासी लीलाधर गोयल, डा अनमोल ग्रोवर, दिनेश शर्मा, मिस्त्री लेखराज, शाम लाल जांगिड़, मनोज शर्मा, संदीप शर्मा, विक्रम शर्मा, अमित धींगड़ा सहित अन्यों ने इस सडक़ का तुरंत निर्माण करने की मांग की है।

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